प्रश्न - *पिछले कई दिनों से ठीक से नींद नहीं आ रही, जब भी सोने की कोशिश करती हूँ, सपने अत्यंत डरावने दिखते हैं, या तो जो मर गए हैं उन्हें देखती हूँ या जो अपने जीवित हैं उन्हें मरा हुआ देखती हूँ। अत्यंत परेशान होकर उठ जाती हूँ दोबारा नींद नहीं आती। कोई उपाय बताइये दी..*
उत्तर - आत्मीय बहन, आइये आपकी नींद व डरावने स्वप्न की जड़ को समझते हैं। आप जिस समस्या से जूझ रही हैं इस मनोविकार को साइकोलॉजी की भाषा में *नाइटमेयर डिसऑर्डर या पैरासोम्निया* बीमारी कहते हैं।
कभी-कभार आने वाले डरावने सपने सामान्य बात है, मगर यदि यह नियमित सिलसिला बन जाए, तो इसे विकार माना जाता है, जिसका उपचार जरूरी है। सपने सब देखते हैं, भले ही कुछ लोगों को जागने पर ये याद न रहते हो।
*नींद की अवस्था में हमारा मस्तिष्क जो वैकल्पिक यथार्थ या काल्पनिक फिल्म रचकर प्रदर्शित कर देता है, उसी को हम सपना कहते हैं। मसाला फिल्मों की ही तरह हमारे सपनों में एक्शन, इमोशन, रोमांस, कॉमेडी आदि सारे तत्व मौजूद रहते हैं- कुछ कम, तो कुछ ज्यादा। कभी-कभी ये सपने हॉरर फिल्म के रूप में भी सामने आते हैं। इन्हें हम डरावना सपना, बुरा सपना, नाइटमेयर या दु:स्वप्न कहते हैं।*
बच्चों को डरावने सपने आना आम बात है, जिसके कारण वे रोते हुए जाग जाते हैं। मगर ऐसा नहीं है कि वयस्कों को डरावने या बुरे सपने नहीं आते। उन्हें भी यह समस्या होती है।
यदा-कदा ऐसे सपने हर किसी को आते हैं। डर के मारे आपकी नींद टूट जाती है, आप हड़बड़ाकर उठ बैठते हैं, धड़कन व सांस तेज चलती हुई महसूस होती है। फिर, आपको एहसास होता है कि यह तो महज एक सपना था। तब धीरे-धीरे आप सामान्य होने लगते हैं। *मगर जब यह एक नियमित सिलसिला बन जाए, बार-बार डरावने सपने के कारण आपकी नींद टूट जाए, इन सपनों के खौफ के कारण आप सोने से ही कतराने लगें, तो इसे मानसिक विकार माना जाता है, जिसे उपचार की जरूरत होती है। इसे नाइटमेयर डिसऑर्डर या पैरासोम्निया कहते हैं।*
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*नाइटमेयर डिसऑर्डर के कारण*
लखनऊ की फिजीशियन डॉक्टर प्रगति सिंह ने गॉव कनेक्शन से बातचीत में बताया कि, “इस डिसऑर्डर के कई कारण हो सकते हैं। एक प्रमुख कारण तो जीवन में हुई कोई त्रासद घटना ही हो सकती है। किसी वजह से यदि आप लगातार तनाव या डिप्रेशन में हैं या फिर व्यग्र हैं, तो भी आपको नियमित रूप से बुरे सपने आ सकते हैं। शराब या ड्रग्स का सेवन भी दु:स्वप्नों का कारण बन सकता है, वहीं इनकी लत छुड़ाने की प्रक्रिया के दौरान भी ऐसे सपने आ सकते हैं। इसी प्रकार किन्हीं दवाइयों के सेवन से या फिर इनका सेवन अचानक बंद कर देने से भी नाइटमेयर डिसऑर्डर की स्थिति बन सकती है।”
वह आगे बताती हैं, “स्लीप एप्निया (नींद के दौरान सांस लेने में परेशानी से जुड़ी समस्या) से ग्रस्त लोग भी नियमित रूप से डरावने सपनों के शिकार हो सकते हैं। कई बार लगातार पर्याप्त नींद से वंचित रहने वाला व्यक्ति जब सोता है, तो ऐसे सपनों का शिकार हो जाता है। इसके अलावा नियमित रूप से डरावनी फिल्में देखने या डरावनी कहानी-उपन्यास पढ़ने वाले लोगों को भी ऐसे सपने आ सकते हैं। सोने से ठीक पहले भारी भोजन करना भी इसका कारण बन सकता है।”
अगर आपके साथ कभी कुछ दुखद घटना घटी हो, तो ऐसे सपने बार- बार आ सकते हैं। इसे हलके में मत लें, यह आपके चित्त में जमी विचारों की गंदगी है, और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, या स्वयं कोई इस हेतु ठोस उपाय करें।
*आधुनिक चिकित्सीय उपचार*
डॉक्टर प्रगति बताती हैं, “यदि सप्ताह में एक से अधिक बार डरावने सपने आएं, यह सिलसिला लगातार बना रहे और इसके कारण आपकी नींद बार-बार बाधित हो तथा दोबारा नींद आना मुश्किल हो जाए, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। *डॉक्टर पॉलीसोम्नोग्राफी नामक टेस्ट कराने को कह सकते हैं, जिसमें नींद के दौरान हृदय गति, मस्तिष्क तरंगों, ऑक्सीजन के स्तर, सांसों तथा आंखों व टांगों की हरकतों को रेकॉर्ड करने के लिए शरीर के विभिन्ना हिस्सों में सेंसर लगाए जाते हैं। इस टेस्ट के परिणाम के आधार पर डॉक्टर उपचार तय कर सकते हैं।”*
*यदि डरावने सपनों का कारण तनाव या डिप्रेशन है, तो उसका उपचार किया जाता है। यदि किसी दवाई के साइड इफेक्ट के कारण ऐसा हो रहा है, तो डॉक्टर वैकल्पिक दवाई बता सकते हैं*। नशीले पदार्थ यदि कारण है, तो उनका सेवन बंद करने से दु:स्वप्नों की समस्या भी दूर हो सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में नाइटमेयर डिसऑर्डर को दूर करने के लिए दवाइयां भी दी जा सकती हैं।
🙏🏻👇🏻 *आध्यात्मिक उपचार* -
1- पहले स्वयं के मन को मजबूत बनाते हुए यह स्वीकारें कि यह मनोविकार मुझे हो गया है।
2- अब ठण्डे दिमाग़ से गूगल सर्च अपने दिमाग़ में चलाएं कि पिछले 6 से 8 महीनों में मेरे साथ ऐसा क्या अप्रिय घटा जिसने मुझे अंदर से हिला दिया। जिसको मैं भूल नहीं पा रही और जो मुझे अंदर ही अंदर खाये जा रहा है, परेशान कर रहा है।
3- अब उन अप्रिय बातों व अप्रिय घटनाओं को विस्तार से काग़ज़ में लिख के पूजन वाले घी के दीपक में जला दें। व भगवान से शक्ति मांगे कि मुझे इन बातों को भूलने की शक्ति दीजिये। यह क्रम 5 गुरुवार को करना है।
4- किसी भी गुरुवार से 10 माला गायत्री मंत्र व 1 माला गुरु मन्त्र नित्य विधिवत जपें
5- या तो 40 दिन तक नित्य गुरुगीता का पाठ करें या श्रीमद्भगवद्गीता के 7 वें अध्याय को जोर ज़ोर बोलते हुए हिंदी या संस्कृत में पढ़े।
6- सूर्यास्त के बाद नमक वाला कोई भोजन न करें, केवल मीठा, दूध व फल ले सकते हैं।
7- आपको 5 गुरुवार व्रत रखना है, व पीला वस्त्र गुरुवार को पहनना है। पीली वस्तुएं ही ग्रहण करनी है। दूध व छाछ में भी चुटकी हल्दी मिलाकर पीना है।
8- सुबह दो चम्मच शहद व आधा नीम्बू गुनगुने पानी मे डालकर ख़ाली पेट पी लेना। शाम को केवल हल्का गर्म एक ग्लास पानी पीकर सोना, कोई अच्छा विचार पढ़ना और पांच लाइन मन्त्रलेखन करके सोना। मन्त्रलेखन पुस्तिका तकिए पर रखकर लिखना व पुस्तिका को सोते वक्त तकिए के नीचे रख देना।
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9- *मष्तिकीय नाड़ियों व कोषों की शुद्धि के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम निम्नलिखित विधि से करो।*
प्रारंभिक स्थिति : ध्यान मुद्रा।
ध्यान दें : श्वास-प्रक्रिया पर।
*दोहराना :*
बाएं नथुने से प्रारम्भ करते हुए 3 बार और दाएं नथुने से प्रारम्भ करते हुए 3 बार। अंत में दोनों नथुनों से सांस खींचकर मुंह से बाहर निकाल देना चाहिए। यह सात बार श्वांस प्रश्वास विधिवत करने को नाड़ीशोधन प्राणायाम कहते हैं। यह क्रिया कम से कम 3 से 5 बार करनी चाहिए। नज़दीकी शक्तिपीठ पर जाकर सीख सकते हैं।
*नाड़ी शोधन प्राणायाम के दौरान भावना(क्या सोचना व कल्पना करना है)* -
सामान्य तनावहीन श्वास पर 5 मिनट ध्यान दें फिर हाथ को प्राणायाम मुद्रा में उठायें।
प्रातः काल पूर्व की ओर मुख करके सुखासन पर बैठकर बाई नासिक से श्वांस खींचे फेफड़े के साथ साथ थोड़ा पेट भी फूल जाए। इस विधि से वह नाभिचक्र को प्रभावित करती है। बाएं नासिका से जो सांस खींची जाती है वह इड़ा नाड़ी द्वारा भीतर जाती है जिसे चन्द्र नाड़ी कहते हैं। इसलिए बाएं नासिका से श्वांस लेते हुए भावना के करें कि नाभि में स्थित पूर्णिमा के चाँद को स्पर्श करके शीतल व प्रकाशित बन रही है। जब श्वांस बाहर करें तो भावना करें कि इड़ा नाड़ी द्वारा लाई शीतलता व प्रकाश से रक्त शुद्ध व पुष्ट बन रहा है। ऐसा तीन बार करें।
उसके बाद दाहिने नासिका से इसी प्रकार श्वांस खींचे। दाहिनी नासिका से जो सांस खींची जाती है वह पिंगला नाड़ी द्वारा भीतर जाती है जिसे सूर्य नाड़ी कहते हैं। इसलिए दाहिने नासिका से श्वांस लेते हुए भावना के करें कि नाभि में स्थित उदीयमान सुनहरे के सूर्य को स्पर्श करके ऊष्म व प्रकाशित बन रही है। जब श्वांस बाहर करें तो भावना करें कि सूर्य नाड़ी द्वारा लाई ऊष्मा व प्रकाश से रक्त शुद्ध, शशक्त व रोगमुक्त बन रहा है। ऐसा तीन बार करें।
अंत में दोनों नथुनों से सांस खींचकर मुंह से बाहर निकाल देना चाहिए, दोनों नासिका से श्वांस सुषुम्ना नाड़ी द्वारा भीतर प्रवेश करता है। यह सात बार श्वांस प्रश्वास (3 बार बाएं नासिका से, 3 बार दाहिने नासिका से और एक बार दोनों नासिका से श्वांस ग्रहण करना व छोड़ना) विधिवत करने को नाड़ीशोधन प्राणायाम कहते हैं।
*शुरुआत में अभ्यास हेतु संख्या गिनने का भी सहारा ले सकते हैं व अभ्यस्त होने पर उपरोक्त विधि ही अपनाएं।*
*लाभ :*
नाड़ी शोधन प्राणयाम रक्त और श्वासतंत्र को शुद्ध करता है। गहरा श्वास रक्त को ऑक्सीजन (प्राणवायु) से भर देता है। यह प्राणायाम श्वास प्रणाली को शक्ति प्रदान करता है और स्नायुतंत्र को संतुलित रखता है। यह चिन्ताओं और सिर दर्द को दूर करने में सहायता करता है।
*सावधानी :*
सुविधा से जितनी देर तक संभव हो श्वास उतनी देर ही रोकें। यदि अस्थमा या हृदय रोग से ग्रस्त हो तो श्वास न रोकें।
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10- विचारों की शुद्धि, शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक स्वास्थ्य लाभ के लिए निम्नलिखित विधि से भावना मन्त्र शाम के समय में एक बार दोहराओ। यह अभ्यास भी 40 दिन करना है।
*युगऋषि* पुस्तक 📖 *पँच तत्वों द्वारा सम्पूर्ण रोगों का निवारण* में गिरा हुआ स्वास्थ्य सम्हालने, आत्मविश्वास बढाने व व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में आशातीत सुधार हेतु *भावना मन्त्र* को विस्तार से बताया है।
अच्छे सकारात्मक विचार से 👉🏻 अच्छी भावनाएं 👉🏻 अच्छी भावनाओं से 👉🏻 स्वास्थ्यकर अच्छे हार्मोन्स स्राव 👉🏻 जिससे स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
प्रतिदिन सायं काल एकांत स्थान पर शांत चित्त होकर, नेत्र बन्द करके बैठ जाइए। शरीर को शिथिल व आरामदायक मुद्रा में रखिये। सब ओर से ध्यान हटाकर शरीर को निम्नलिखित *भावना मन्त्र* पर मन-चित्त को ध्यानस्थ कीजिये। दृढ़ता से यह विश्वास कीजिये कि *भावना मन्त्र* में कहे गए *दिव्य शक्ति युक्त वचन* से आपके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। आप स्वस्थ हो रहे हैं।
सर्वप्रथम मन ही मन 5 बार गायत्रीमंत्र जपिये व 3 बार महामृत्युंजय मंत्र जपिये:-
गायत्रीमंत्र - *ॐ भूर्भुवः स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गोदेवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।*
महामृत्युंजय मंत्र - *ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।*
*उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥*
कुछ क्षण ईश्वर का ध्यान कीजिये, फिर भावना मन्त्र के एक एक वाक्यों को ध्यान से बोलिये व महसूस कीजिये।
👉🏻🌹🌹 *भावना मन्त्र* 🌹🌹👈🏻
"मेरे रक्त का रंग खूब लाल है, यह मेरे उत्तम स्वास्थ्य का द्योतक है। इसमें अपूर्व ताजापन है। इसमें कोई विजातीय तत्व नहीं है, इस रक्त में प्राण तत्व प्रवाहित हो रहा है। मैं स्वस्थ व सुडौल हूँ और मेरे शरीर के अणु अणु से जीवन रश्मियाँ नीली नीली रौशनी के रूप में निकल रही है। मेरे नेत्रों से तेज और ओज निकल रहा है, जिससे मेरी तेजस्विता, मनस्विता, प्रखरता व सामर्थ्य प्रकाशित हो रहा है। मेरे फेफड़े बलवान व स्वस्थ हैं, मैं गहरी श्वांस ले रहा हूँ, मेरी श्वांस से ब्रह्मांड में व्याप्त प्राणतत्व खीचा जा रहा है, यह मुझे नित्य रोग मुक्त कर रहा है। मुझे किसी भी प्रकार का रोग नहीं है, मैं मेरे स्वास्थ्य को दिन प्रति दिन निखरता महसूस कर रहा हूँ। यह मेरी प्रत्यक्ष अनुभूति है कि मेरा अंग अंग मजबूत व प्राणवान हो रहा है। मैं शक्तिशाली हूँ। आरोग्य-रक्षिणी शक्ति मेरे रक्त के अंदर प्रचुर मात्रा में मौजूद है।मेरा मष्तिष्क सुदृढ व बलवान है। यह सकारात्मक विचारों से भरा हुआ है।"
"मैं शुद्ध आत्मतेज को धारण कर रहा हूँ, अपनी शक्ति व स्वास्थ्य की वृद्धि करना मेरा परम् लक्ष्य है। मैं आधिकारिक शक्ति प्राप्त करूंगा, स्वस्थ बनूँगा, ऊंचा उठूँगा। अब मैं समस्त बीमारी और कमज़ोरियों को परास्त कर दूंगा। मेरे भीतर की चेतन व गुप्त शक्तियां जागृत हो उठी हैं। मैं अपने जीवन में सफ़लता के मार्गपर अग्रसर हूँ। मैं अपनी समस्त समस्याओं के समाधान हेतु सक्षम बन गया हूँ।"
"अब मैं एक बलवान शक्ति पिंड हूँ, एक ऊर्जा पुंज हूँ। अब मैं जीवन तत्वों का भंडार हूँ। अब मैं स्वस्थ, बलवान और प्रशन्न हूँ।"
निम्नलिखित सङ्कल्प मन में पूर्ण विश्वास से सुबह उठते ही दोहराईये:-
1- मैं त्रिपदा गायत्री की सर्वशक्तिमान पुत्र/पुत्री हूँ।
2- मैं बुद्धिमान, ऐश्वर्यवान व बलवान परमात्मा का बुद्धिमान, ऐश्वर्यवान व बलवान पुत्र/पुत्री हूँ।
3- मैं गायत्री की गर्भनाल से जुड़ा/जुड़ी हूँ और माता गायत्री मेरा पोषण कर रही हैं। मुझे बुद्धि, स्वास्थ्य, सौंदर्य व बल प्रदान कर रही है।
4- मैं वेदमाता का वेददूत पुत्र/पुत्री हूँ। मुझमें ज्ञान जग रहा/रही है।
5- जो गुण माता के हैं वो समस्त गुण मुझमें है।
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फिर गायत्रीमंत्र - *ॐ भूर्भुवः स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गोदेवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।* बोलते हुए दोनों हाथ को आपस मे रगड़िये। हाथ की हथेलियों को आंखों के उपर रखिये धीरे धीरे आंख खोलकर हथेलियों को देखिए। फिर हाथ को पहले चेहरे पर ऐसे घुमाइए मानो प्राणतत्व की औषधीय क्रीम चेहरे पर लगा रहे हो। फिर हाथ को समस्त शरीर मे घुमाइए।
शांति तीन पाठ निम्नलिखित मन्त्र द्वारा बोलिये सबके स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए दोहराइये:-
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
11- नित्य बलिवैश्व यज्ञ अवश्य करें। भगवान को अर्पित करके ही भोजन ग्रहण करें।
12- यज्ञ द्वारा पूर्णाहुति 40 दिन बाद अवश्य कर लें।
उपरोक्त विधि 40 दिन तक अपनाओ और जब 6 महीने तक गहरी नींद व सुखमय जीवन का आनन्द उठा लेना तो मेरी फीस के रूप में 500 प्रतियां *हारिये न हिम्मत की* स्कूलों में किशोर लड़के व लड़कियों को बांट देना। साथ ही बच्चों के साथ फ़ोटो खींचकर मुझे भेज देना। यह उपरोक्त आध्यात्मिक इलाज़ शुरू करने से पहले एक काग़ज़ में सङ्कल्प लिख कर भगवान के पास रख दो, कि भगवान यदि मैं पूर्णतयः इस *नाइटमेयर डिसऑर्डर - पैरासोमनिया से मुक्त हो जाऊंगी। व चैन से सोने लगूंगी तो* 500 प्रतियां *हारिये न हिम्मत* पुस्तक किशोर व किशोरी बच्चों को बांटूंगी। यह पुस्तक आपको भी पढ़ना है, 5 रुपये की छोटी पॉकेट पुस्तक है।
🙏🏻श्वेता, DIYA
उत्तर - आत्मीय बहन, आइये आपकी नींद व डरावने स्वप्न की जड़ को समझते हैं। आप जिस समस्या से जूझ रही हैं इस मनोविकार को साइकोलॉजी की भाषा में *नाइटमेयर डिसऑर्डर या पैरासोम्निया* बीमारी कहते हैं।
कभी-कभार आने वाले डरावने सपने सामान्य बात है, मगर यदि यह नियमित सिलसिला बन जाए, तो इसे विकार माना जाता है, जिसका उपचार जरूरी है। सपने सब देखते हैं, भले ही कुछ लोगों को जागने पर ये याद न रहते हो।
*नींद की अवस्था में हमारा मस्तिष्क जो वैकल्पिक यथार्थ या काल्पनिक फिल्म रचकर प्रदर्शित कर देता है, उसी को हम सपना कहते हैं। मसाला फिल्मों की ही तरह हमारे सपनों में एक्शन, इमोशन, रोमांस, कॉमेडी आदि सारे तत्व मौजूद रहते हैं- कुछ कम, तो कुछ ज्यादा। कभी-कभी ये सपने हॉरर फिल्म के रूप में भी सामने आते हैं। इन्हें हम डरावना सपना, बुरा सपना, नाइटमेयर या दु:स्वप्न कहते हैं।*
बच्चों को डरावने सपने आना आम बात है, जिसके कारण वे रोते हुए जाग जाते हैं। मगर ऐसा नहीं है कि वयस्कों को डरावने या बुरे सपने नहीं आते। उन्हें भी यह समस्या होती है।
यदा-कदा ऐसे सपने हर किसी को आते हैं। डर के मारे आपकी नींद टूट जाती है, आप हड़बड़ाकर उठ बैठते हैं, धड़कन व सांस तेज चलती हुई महसूस होती है। फिर, आपको एहसास होता है कि यह तो महज एक सपना था। तब धीरे-धीरे आप सामान्य होने लगते हैं। *मगर जब यह एक नियमित सिलसिला बन जाए, बार-बार डरावने सपने के कारण आपकी नींद टूट जाए, इन सपनों के खौफ के कारण आप सोने से ही कतराने लगें, तो इसे मानसिक विकार माना जाता है, जिसे उपचार की जरूरत होती है। इसे नाइटमेयर डिसऑर्डर या पैरासोम्निया कहते हैं।*
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*नाइटमेयर डिसऑर्डर के कारण*
लखनऊ की फिजीशियन डॉक्टर प्रगति सिंह ने गॉव कनेक्शन से बातचीत में बताया कि, “इस डिसऑर्डर के कई कारण हो सकते हैं। एक प्रमुख कारण तो जीवन में हुई कोई त्रासद घटना ही हो सकती है। किसी वजह से यदि आप लगातार तनाव या डिप्रेशन में हैं या फिर व्यग्र हैं, तो भी आपको नियमित रूप से बुरे सपने आ सकते हैं। शराब या ड्रग्स का सेवन भी दु:स्वप्नों का कारण बन सकता है, वहीं इनकी लत छुड़ाने की प्रक्रिया के दौरान भी ऐसे सपने आ सकते हैं। इसी प्रकार किन्हीं दवाइयों के सेवन से या फिर इनका सेवन अचानक बंद कर देने से भी नाइटमेयर डिसऑर्डर की स्थिति बन सकती है।”
वह आगे बताती हैं, “स्लीप एप्निया (नींद के दौरान सांस लेने में परेशानी से जुड़ी समस्या) से ग्रस्त लोग भी नियमित रूप से डरावने सपनों के शिकार हो सकते हैं। कई बार लगातार पर्याप्त नींद से वंचित रहने वाला व्यक्ति जब सोता है, तो ऐसे सपनों का शिकार हो जाता है। इसके अलावा नियमित रूप से डरावनी फिल्में देखने या डरावनी कहानी-उपन्यास पढ़ने वाले लोगों को भी ऐसे सपने आ सकते हैं। सोने से ठीक पहले भारी भोजन करना भी इसका कारण बन सकता है।”
अगर आपके साथ कभी कुछ दुखद घटना घटी हो, तो ऐसे सपने बार- बार आ सकते हैं। इसे हलके में मत लें, यह आपके चित्त में जमी विचारों की गंदगी है, और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, या स्वयं कोई इस हेतु ठोस उपाय करें।
*आधुनिक चिकित्सीय उपचार*
डॉक्टर प्रगति बताती हैं, “यदि सप्ताह में एक से अधिक बार डरावने सपने आएं, यह सिलसिला लगातार बना रहे और इसके कारण आपकी नींद बार-बार बाधित हो तथा दोबारा नींद आना मुश्किल हो जाए, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। *डॉक्टर पॉलीसोम्नोग्राफी नामक टेस्ट कराने को कह सकते हैं, जिसमें नींद के दौरान हृदय गति, मस्तिष्क तरंगों, ऑक्सीजन के स्तर, सांसों तथा आंखों व टांगों की हरकतों को रेकॉर्ड करने के लिए शरीर के विभिन्ना हिस्सों में सेंसर लगाए जाते हैं। इस टेस्ट के परिणाम के आधार पर डॉक्टर उपचार तय कर सकते हैं।”*
*यदि डरावने सपनों का कारण तनाव या डिप्रेशन है, तो उसका उपचार किया जाता है। यदि किसी दवाई के साइड इफेक्ट के कारण ऐसा हो रहा है, तो डॉक्टर वैकल्पिक दवाई बता सकते हैं*। नशीले पदार्थ यदि कारण है, तो उनका सेवन बंद करने से दु:स्वप्नों की समस्या भी दूर हो सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में नाइटमेयर डिसऑर्डर को दूर करने के लिए दवाइयां भी दी जा सकती हैं।
🙏🏻👇🏻 *आध्यात्मिक उपचार* -
1- पहले स्वयं के मन को मजबूत बनाते हुए यह स्वीकारें कि यह मनोविकार मुझे हो गया है।
2- अब ठण्डे दिमाग़ से गूगल सर्च अपने दिमाग़ में चलाएं कि पिछले 6 से 8 महीनों में मेरे साथ ऐसा क्या अप्रिय घटा जिसने मुझे अंदर से हिला दिया। जिसको मैं भूल नहीं पा रही और जो मुझे अंदर ही अंदर खाये जा रहा है, परेशान कर रहा है।
3- अब उन अप्रिय बातों व अप्रिय घटनाओं को विस्तार से काग़ज़ में लिख के पूजन वाले घी के दीपक में जला दें। व भगवान से शक्ति मांगे कि मुझे इन बातों को भूलने की शक्ति दीजिये। यह क्रम 5 गुरुवार को करना है।
4- किसी भी गुरुवार से 10 माला गायत्री मंत्र व 1 माला गुरु मन्त्र नित्य विधिवत जपें
5- या तो 40 दिन तक नित्य गुरुगीता का पाठ करें या श्रीमद्भगवद्गीता के 7 वें अध्याय को जोर ज़ोर बोलते हुए हिंदी या संस्कृत में पढ़े।
6- सूर्यास्त के बाद नमक वाला कोई भोजन न करें, केवल मीठा, दूध व फल ले सकते हैं।
7- आपको 5 गुरुवार व्रत रखना है, व पीला वस्त्र गुरुवार को पहनना है। पीली वस्तुएं ही ग्रहण करनी है। दूध व छाछ में भी चुटकी हल्दी मिलाकर पीना है।
8- सुबह दो चम्मच शहद व आधा नीम्बू गुनगुने पानी मे डालकर ख़ाली पेट पी लेना। शाम को केवल हल्का गर्म एक ग्लास पानी पीकर सोना, कोई अच्छा विचार पढ़ना और पांच लाइन मन्त्रलेखन करके सोना। मन्त्रलेखन पुस्तिका तकिए पर रखकर लिखना व पुस्तिका को सोते वक्त तकिए के नीचे रख देना।
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9- *मष्तिकीय नाड़ियों व कोषों की शुद्धि के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम निम्नलिखित विधि से करो।*
प्रारंभिक स्थिति : ध्यान मुद्रा।
ध्यान दें : श्वास-प्रक्रिया पर।
*दोहराना :*
बाएं नथुने से प्रारम्भ करते हुए 3 बार और दाएं नथुने से प्रारम्भ करते हुए 3 बार। अंत में दोनों नथुनों से सांस खींचकर मुंह से बाहर निकाल देना चाहिए। यह सात बार श्वांस प्रश्वास विधिवत करने को नाड़ीशोधन प्राणायाम कहते हैं। यह क्रिया कम से कम 3 से 5 बार करनी चाहिए। नज़दीकी शक्तिपीठ पर जाकर सीख सकते हैं।
*नाड़ी शोधन प्राणायाम के दौरान भावना(क्या सोचना व कल्पना करना है)* -
सामान्य तनावहीन श्वास पर 5 मिनट ध्यान दें फिर हाथ को प्राणायाम मुद्रा में उठायें।
प्रातः काल पूर्व की ओर मुख करके सुखासन पर बैठकर बाई नासिक से श्वांस खींचे फेफड़े के साथ साथ थोड़ा पेट भी फूल जाए। इस विधि से वह नाभिचक्र को प्रभावित करती है। बाएं नासिका से जो सांस खींची जाती है वह इड़ा नाड़ी द्वारा भीतर जाती है जिसे चन्द्र नाड़ी कहते हैं। इसलिए बाएं नासिका से श्वांस लेते हुए भावना के करें कि नाभि में स्थित पूर्णिमा के चाँद को स्पर्श करके शीतल व प्रकाशित बन रही है। जब श्वांस बाहर करें तो भावना करें कि इड़ा नाड़ी द्वारा लाई शीतलता व प्रकाश से रक्त शुद्ध व पुष्ट बन रहा है। ऐसा तीन बार करें।
उसके बाद दाहिने नासिका से इसी प्रकार श्वांस खींचे। दाहिनी नासिका से जो सांस खींची जाती है वह पिंगला नाड़ी द्वारा भीतर जाती है जिसे सूर्य नाड़ी कहते हैं। इसलिए दाहिने नासिका से श्वांस लेते हुए भावना के करें कि नाभि में स्थित उदीयमान सुनहरे के सूर्य को स्पर्श करके ऊष्म व प्रकाशित बन रही है। जब श्वांस बाहर करें तो भावना करें कि सूर्य नाड़ी द्वारा लाई ऊष्मा व प्रकाश से रक्त शुद्ध, शशक्त व रोगमुक्त बन रहा है। ऐसा तीन बार करें।
अंत में दोनों नथुनों से सांस खींचकर मुंह से बाहर निकाल देना चाहिए, दोनों नासिका से श्वांस सुषुम्ना नाड़ी द्वारा भीतर प्रवेश करता है। यह सात बार श्वांस प्रश्वास (3 बार बाएं नासिका से, 3 बार दाहिने नासिका से और एक बार दोनों नासिका से श्वांस ग्रहण करना व छोड़ना) विधिवत करने को नाड़ीशोधन प्राणायाम कहते हैं।
*शुरुआत में अभ्यास हेतु संख्या गिनने का भी सहारा ले सकते हैं व अभ्यस्त होने पर उपरोक्त विधि ही अपनाएं।*
*लाभ :*
नाड़ी शोधन प्राणयाम रक्त और श्वासतंत्र को शुद्ध करता है। गहरा श्वास रक्त को ऑक्सीजन (प्राणवायु) से भर देता है। यह प्राणायाम श्वास प्रणाली को शक्ति प्रदान करता है और स्नायुतंत्र को संतुलित रखता है। यह चिन्ताओं और सिर दर्द को दूर करने में सहायता करता है।
*सावधानी :*
सुविधा से जितनी देर तक संभव हो श्वास उतनी देर ही रोकें। यदि अस्थमा या हृदय रोग से ग्रस्त हो तो श्वास न रोकें।
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10- विचारों की शुद्धि, शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक स्वास्थ्य लाभ के लिए निम्नलिखित विधि से भावना मन्त्र शाम के समय में एक बार दोहराओ। यह अभ्यास भी 40 दिन करना है।
*युगऋषि* पुस्तक 📖 *पँच तत्वों द्वारा सम्पूर्ण रोगों का निवारण* में गिरा हुआ स्वास्थ्य सम्हालने, आत्मविश्वास बढाने व व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में आशातीत सुधार हेतु *भावना मन्त्र* को विस्तार से बताया है।
अच्छे सकारात्मक विचार से 👉🏻 अच्छी भावनाएं 👉🏻 अच्छी भावनाओं से 👉🏻 स्वास्थ्यकर अच्छे हार्मोन्स स्राव 👉🏻 जिससे स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
प्रतिदिन सायं काल एकांत स्थान पर शांत चित्त होकर, नेत्र बन्द करके बैठ जाइए। शरीर को शिथिल व आरामदायक मुद्रा में रखिये। सब ओर से ध्यान हटाकर शरीर को निम्नलिखित *भावना मन्त्र* पर मन-चित्त को ध्यानस्थ कीजिये। दृढ़ता से यह विश्वास कीजिये कि *भावना मन्त्र* में कहे गए *दिव्य शक्ति युक्त वचन* से आपके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। आप स्वस्थ हो रहे हैं।
सर्वप्रथम मन ही मन 5 बार गायत्रीमंत्र जपिये व 3 बार महामृत्युंजय मंत्र जपिये:-
गायत्रीमंत्र - *ॐ भूर्भुवः स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गोदेवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।*
महामृत्युंजय मंत्र - *ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।*
*उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥*
कुछ क्षण ईश्वर का ध्यान कीजिये, फिर भावना मन्त्र के एक एक वाक्यों को ध्यान से बोलिये व महसूस कीजिये।
👉🏻🌹🌹 *भावना मन्त्र* 🌹🌹👈🏻
"मेरे रक्त का रंग खूब लाल है, यह मेरे उत्तम स्वास्थ्य का द्योतक है। इसमें अपूर्व ताजापन है। इसमें कोई विजातीय तत्व नहीं है, इस रक्त में प्राण तत्व प्रवाहित हो रहा है। मैं स्वस्थ व सुडौल हूँ और मेरे शरीर के अणु अणु से जीवन रश्मियाँ नीली नीली रौशनी के रूप में निकल रही है। मेरे नेत्रों से तेज और ओज निकल रहा है, जिससे मेरी तेजस्विता, मनस्विता, प्रखरता व सामर्थ्य प्रकाशित हो रहा है। मेरे फेफड़े बलवान व स्वस्थ हैं, मैं गहरी श्वांस ले रहा हूँ, मेरी श्वांस से ब्रह्मांड में व्याप्त प्राणतत्व खीचा जा रहा है, यह मुझे नित्य रोग मुक्त कर रहा है। मुझे किसी भी प्रकार का रोग नहीं है, मैं मेरे स्वास्थ्य को दिन प्रति दिन निखरता महसूस कर रहा हूँ। यह मेरी प्रत्यक्ष अनुभूति है कि मेरा अंग अंग मजबूत व प्राणवान हो रहा है। मैं शक्तिशाली हूँ। आरोग्य-रक्षिणी शक्ति मेरे रक्त के अंदर प्रचुर मात्रा में मौजूद है।मेरा मष्तिष्क सुदृढ व बलवान है। यह सकारात्मक विचारों से भरा हुआ है।"
"मैं शुद्ध आत्मतेज को धारण कर रहा हूँ, अपनी शक्ति व स्वास्थ्य की वृद्धि करना मेरा परम् लक्ष्य है। मैं आधिकारिक शक्ति प्राप्त करूंगा, स्वस्थ बनूँगा, ऊंचा उठूँगा। अब मैं समस्त बीमारी और कमज़ोरियों को परास्त कर दूंगा। मेरे भीतर की चेतन व गुप्त शक्तियां जागृत हो उठी हैं। मैं अपने जीवन में सफ़लता के मार्गपर अग्रसर हूँ। मैं अपनी समस्त समस्याओं के समाधान हेतु सक्षम बन गया हूँ।"
"अब मैं एक बलवान शक्ति पिंड हूँ, एक ऊर्जा पुंज हूँ। अब मैं जीवन तत्वों का भंडार हूँ। अब मैं स्वस्थ, बलवान और प्रशन्न हूँ।"
निम्नलिखित सङ्कल्प मन में पूर्ण विश्वास से सुबह उठते ही दोहराईये:-
1- मैं त्रिपदा गायत्री की सर्वशक्तिमान पुत्र/पुत्री हूँ।
2- मैं बुद्धिमान, ऐश्वर्यवान व बलवान परमात्मा का बुद्धिमान, ऐश्वर्यवान व बलवान पुत्र/पुत्री हूँ।
3- मैं गायत्री की गर्भनाल से जुड़ा/जुड़ी हूँ और माता गायत्री मेरा पोषण कर रही हैं। मुझे बुद्धि, स्वास्थ्य, सौंदर्य व बल प्रदान कर रही है।
4- मैं वेदमाता का वेददूत पुत्र/पुत्री हूँ। मुझमें ज्ञान जग रहा/रही है।
5- जो गुण माता के हैं वो समस्त गुण मुझमें है।
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फिर गायत्रीमंत्र - *ॐ भूर्भुवः स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गोदेवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।* बोलते हुए दोनों हाथ को आपस मे रगड़िये। हाथ की हथेलियों को आंखों के उपर रखिये धीरे धीरे आंख खोलकर हथेलियों को देखिए। फिर हाथ को पहले चेहरे पर ऐसे घुमाइए मानो प्राणतत्व की औषधीय क्रीम चेहरे पर लगा रहे हो। फिर हाथ को समस्त शरीर मे घुमाइए।
शांति तीन पाठ निम्नलिखित मन्त्र द्वारा बोलिये सबके स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए दोहराइये:-
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः
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11- नित्य बलिवैश्व यज्ञ अवश्य करें। भगवान को अर्पित करके ही भोजन ग्रहण करें।
12- यज्ञ द्वारा पूर्णाहुति 40 दिन बाद अवश्य कर लें।
उपरोक्त विधि 40 दिन तक अपनाओ और जब 6 महीने तक गहरी नींद व सुखमय जीवन का आनन्द उठा लेना तो मेरी फीस के रूप में 500 प्रतियां *हारिये न हिम्मत की* स्कूलों में किशोर लड़के व लड़कियों को बांट देना। साथ ही बच्चों के साथ फ़ोटो खींचकर मुझे भेज देना। यह उपरोक्त आध्यात्मिक इलाज़ शुरू करने से पहले एक काग़ज़ में सङ्कल्प लिख कर भगवान के पास रख दो, कि भगवान यदि मैं पूर्णतयः इस *नाइटमेयर डिसऑर्डर - पैरासोमनिया से मुक्त हो जाऊंगी। व चैन से सोने लगूंगी तो* 500 प्रतियां *हारिये न हिम्मत* पुस्तक किशोर व किशोरी बच्चों को बांटूंगी। यह पुस्तक आपको भी पढ़ना है, 5 रुपये की छोटी पॉकेट पुस्तक है।
🙏🏻श्वेता, DIYA
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